कामाख्या मन्दिर का इतिहास और रोचक बातें

कामाख्या मन्दिर का इतिहास और रोचक बातें – भारत एक ऐसा देश है जहां हिंदू धर्म को अत्यधिक मान्यता भी जाती है तथा हिंदू धर्म से जुड़े कई ऐतिहासिक मंदिर भारत में ही पाए जाते हैं। पुरानी मान्यताओं के अनुसार जब सती माता के 51 टुकड़े किए गए थे। तो वह टुकड़े जहां-जहां गिरे वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई इन स्थानों को पावन तीर्थ स्थलों के नाम से जाना जाता है। जिनमे से कामाख्या मन्दिर भी है।

जो पश्चिम बंगाल की गुवाहाटी निलांचल पहाड़ी क्षेत्र असम में स्थित है। इस मंदिर को कामाख्या देवी की प्रतिमा स्थित है इसके अलावा यहां देवी के अन्य 10 रूप जैसे तारा, कमला, भैरवी, भुनेश्वरी, मातंगी धूमावती, त्रिपुरा सुंदरी आदि के दर्शन करने को मिलते है। आज हम आप सभी के साथ कामाख्या मन्दिर का इतिहास और रोचक बातें पर चर्चा करेंगे।

कामाख्या मन्दिर का इतिहास

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता सती के पिता प्रजापति दक्ष एक महान यज्ञ कर रहे थे जिसमें उन्होंने भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था और भगवान शिव के मना करने के बाद भी मालूम थी यदि में पहुंची तो प्रजापति दक्ष के द्वारा भगवान शिव का घोर अपमान किया गया जिससे क्रोधित होकर माता सती ने हवन कुंड में कूद कर अपने प्राणों की आहुति दे दी है।

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भगवान शिव को जब यह बात पता चली तो मैं सीधा उस स्थान पर पहुंचे जहां महायज्ञ हो रहा था और उन्हें अपनी पत्नी का मृत शरीर को लेकर पूरी पृथ्वी पर पर चांडक करने लगे। जिसके बाद विष्णु भगवान ने शिव जी का क्रोध शांत करने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के 51 टुकड़े किए जो पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर गिरे जहां-जहां माता सती के शरीरों के टुकड़े गिरे उन्हें शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।

कामाख्या मंदिर के बारे में रोचक बातें

यदि आप हिंदू धर्म से संबंध रखते हैं तो आपको इस मंदिर से जुड़ी कई रोचक बातें हैं जिनके बारे में आपको जरूर पता होना चाहिए जिनके बारे में हमने नीचे जानकारी प्रदान की है-

  • कामाख्या मंदिर का आकार देखने में एक कुंड के समान दिखाई देता है तथा इसके चारों ओर हमेशा पानी निकलता रहता है जिनकी बजह से इससे दूर से देखने मे एक कुंड की आकृति दिखाई देती है।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में प्रतिवर्ष लगने वाले अम्बुबाची मेले का आयोजन किया जाता है उस समय स्वयं मां कामाख्या रजस्वला होती है और इन मंदिर में जल की बजह रक्त निकलता है।
  • इस मंदिर में मां कामाख्या देवी का प्रतिदिन पूजन करने के साथ-साथ ही कई अन्य प्रकार की विशेष पूजा की जाती हैं इससे इस मंदिर के पास का वातावरण बहुत ही स्थान प्रतीत होता है तथा मन को शांति देता है।
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण करने के लिए विश्वकर्मा को बुलाया गया था जिसमें चौसठ योगिनियों एवं 18 भैरवों की मूर्तियाँ का निर्माण है।
  • इसके अलावा इस मंदिर के उत्तर में देवी का क्रीडा तालाब स्थित है मान्यताओं के अनुसार जो लोग इस तालाब की परिक्रमा करते हैं उनके पाप खत्म होकर पुण्य बढ़ते है।

निष्कर्ष

हम आशा करते हैं कि आपको हमारी वेबसाइट पर आज के ब्लॉक पोस्ट में कामाख्या मन्दिर का इतिहास के बारे में जानकारी समझ आ गई होगी। और आप भारतवर्ष में जुड़े इतिहास के बारे में और अधिक जान चुके होंगे अगर आपको हमारी वेबसाइट पर भारतवर्ष में स्थित मंदिरों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करनी है तो हमारे वेबसाइट पर बने रहें तथा इस लेख को सभी लोगों के साथ शेयर करें ताकि वह भी हमारे इतिहास के बारे में और अधिक जान पायें।

 

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