योगी सरकार में आखिर कहां गायब हो गए 3000 मदरसे, मामले की हो रही जांच

एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के पिछले 4 साल के कार्यकाल में 3000 मान्यता प्राप्त मदरसे गायब हो गए हैं। मदरसा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की कड़ी निगरानी और नए नियमों की वजह से ऐसा हुआ है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा 18 अगस्त 2017 को एक मदरसा पोर्टल लॉन्च किया गया था। जिसके अंतर्गत पहले परिसर के अभिलेखों में कुल 19123 मान्यता प्राप्त मदरसे पंजीकृत थे, उनमें से अब 16222 पंजीकृत मदरसे अस्तित्व में है। इनमें से केवल 558 मदरसे हैं, जिन्हें राज्य सरकार अनुदान देती है। बाकी मदरसे जकात और चंदे से चलाए जाते हैं।

Madarsa ban

आपको बता दें कि मदरसा पोर्टल से आने से पहले उत्तर प्रदेश के अंदर चल रहे मदरसों की जानकारी केवल कागजों पर होती थी, मदरसे के बजाय निदेशक भवन, छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के विवरण की जांच में लापरवाही बरती जाती थी।

इसी लापरवाही का फायदा उठाकर राज्य के विभिन्न इलाकों में खासकर सीमावर्ती जिलों गोंडा बस्ती, बहराइच, बलरामपुर आदि में तमाम मदरसे अस्तित्व में आ गए थे। हकीकत यह थी कि इनमें से कई मदरसे सिर्फ कागज, जकात और चंदा पर ही थे।

उन्हीं नए नियमों का पालन करने के लिए मदरसा शिक्षा परिषद और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने भी मदरसा पोर्टल पर पंजीकृत प्रत्येक व्यक्ति की जांच शुरू की और इस तलाशी जांच में 3000 मदरसे नहीं मिले हैं।

दरअसल, जो 3000 मदरसे गायब हो गए हैं, वास्तव में यह एक धोखाधड़ी थी, ऐसी कई शिकायतें सामने आई थीं कि एक ही शिक्षक कई मदरसों में पढ़ा रहा है और वेतन लेने वाला प्रबंधक अपने रिश्तेदारों को ही शिक्षक बना रहा है।

शिक्षकों की योग्यता के शीर्ष पर भी सवाल भी उठाए गए, इसलिए किसी भी शिकायत की जांच के लिए मानव संपदा पोर्टल बनाया गया, एसआईटी का भी गठन किया गया, जिसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई भी की जा रही है।

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