सांची के स्तूप से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां

सांची के स्तूप से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां – आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको सांची के स्तूप से जुड़े कुछ रोचक जानकारियां देंगे। तो साथियों अगर आप भी सांची के स्तूप से जुड़ी रोचक जानकारियों के बारे में जानना चाहते हैं आर्टिकल को आखरी तक पूरा पढ़िए। इस आर्टिकल में आपको सांची के स्तूप से जुड़े कुछ विशेष जानकारियों के बारे में बताया गया है।

साथियों आप सभी ने सांची के स्तूप के बारे में जरूर सुना होगा। अगर आपको इतिहास की जानकारी है तो इतिहास की किताबों में आपने सांची का स्तूप का जिक्र जरूर देखा होगा। मुख्य रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों के लिए सांची का स्तूप एक बहुत पवित्र और ऐतिहासिक जगह है। लेकिन सांची के स्तूप में न सिर्फ बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग बल्कि पूरी दुनिया में हर धर्म संस्कृति में विश्वास रखने वाले लोग प्रतिदिन आते हैं। सांची के स्तूप की सुंदरता और यहां का इतिहास से कुछ ऐसा है कि जो व्यक्ति एक बार यहां पर आता है तो वह यहीं का होकर रह जाता है।

सांची का स्तूप मुख्य रूप से मध्यप्रदेश भोपाल से लगभग 45 किलोमीटर दूर सांची नामक स्थान पर बना हुआ है। यह स्तोत्र बौद्ध धर्म को पूरी तरह से समर्पित है। यहां की वास्तुकला गुंबद और यहां का इतिहास आपको एक अलग ही दुनिया की अनुभूति कराता है। सांची के स्तूप में प्रतिदिन देश और दुनिया के सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं और यहां के इतिहास को जानकर हैरान हो जाते हैं।

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आप अभी तक सांची के स्तूप दर्शन के लिए नहीं गए हैं तो हो सकता है आपको सांची के स्तूप से जुड़ी ज्यादा विशेष जानकारियों के बारे में ना पता हो। अगर आपको सांची के स्तूप से जुड़ा इतिहास नहीं पता तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस आर्टिकल में आपको सांची के स्तूप से जुड़ी हर एक आवश्यक जानकारी दी जाएगी।

सांची के स्तूप से जुड़ी कुछ विशेष जानकारी

आइए साथियों अब हम आपका ज्यादा समय बर्बाद ना करते हुए आपको सांची के स्तूप से जुड़ी कुछ विशेष जानकारियों के बारे में बताते हैं। सांची के स्तूप से जुड़े विषय जानकारियों के बारे में नीचे बताया गया है।

  • सांची का स्तूप शांति और अहिंसा प्रेम को समर्पित है। यह बौद्ध धर्म का एक पवित्र तीर्थ स्थान है जहां पर लाखों बौद्ध श्रद्धालु आते हैं।
  • सांची के स्तूप को देखने के लिए विदेशों से लाखों पर्यटक आते हैं। इनमें से कुछ पर्यटक तो ऐसे होते हैं जो सांची के इतिहास को जानकर और स्तूप की भव्यता को देखकर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लेते हैं।
  • सांची के स्तूप के थोड़ा नजदीक जब आप जाएंगे तो वहां पर आपको अनेक बौद्ध भंते के मठ देखने को मिल जाएंगे। इतिहास का ऐसा मानना है कि यहां पर बहुत श्रद्धालु निवास करते थे और यहीं से धर्म का प्रचार करते थे।
  • सांची का स्तूप हिंदू धर्म के मंदिरों से पूरी तरह से अलग है। मंदिरों में गर्भ ग्रह होता है किंतु सांची के स्तूप में किसी भी तरह का कोई भी ग्रभ ग्रह आपको देखने को नहीं मिलेगा।
  • सांची के स्तूप को मौर्य साम्राज्य के राजा विश्व विजेता सम्राट अशोक ने बनवाया था।
  • सांची के स्तूप को पूरी तरह से मौसम के अनुकूल बनाया गया है। नीचे ईट की चिकनी परत है और उसके ऊपर मिट्टी डालकर गुंबद का आकार दिया गया है जिस पर मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • बड़ी हैरानी की बात है सांची का स्तूप पूरी तरह से भगवान गौतम बुद्ध और बौद्ध धर्म को समर्पित है लेकिन इसके बावजूद वहां पर आपको बहुत धर्म की एक भी मूर्ति देखने को नहीं मिलेगी। गौतम बुध की मूर्ति ना होने के पीछे कारण यह है कि गौतम बुद्ध मूर्ति पूजा के खिलाफ थे और उन्होंने स्वयं की मूर्ति नहीं लगने दी।
  • सांची का स्तूप जमीन से थोड़ा ऊपर पहाड़ी पर बना हुआ है। जब आप सांची के स्तूप से आसपास का नजारा देखेंगे तो यह नजारा बहुत ही मनमोहक लगता है।

निष्कर्ष

तो साथियों यह आज आपके लिए एक छोटी सी जानकारी थी। आज इस आर्टिकल में हमने आपको सांची के स्तूप से जुड़ी जानकारी दी। इस आर्टिकल में हमने आपको बताया सांची का स्तूप का इतिहास क्या है? सांची के स्तूप से जुड़े रोचक जानकारियां कौन-कौन से हैं?

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